“जांच पूरी होने तक विवादित समितियों से न हो कोई वार्ता” — प्रबंधन को सौंपा गया पत्र
गेवरा-दीपका। एसईसीएल के गेवरा क्षेत्र में विभिन्न श्रमिक समितियों के गठन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। हिन्द खदान मजदूर फेडरेशन (एच.एम.एस.) ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए प्रबंधन को पत्र सौंपकर कई समितियों की वैधानिकता पर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं। संगठन ने मांग की है कि 31 दिसंबर 2025 से पूर्व विधिवत गठित और मान्यता प्राप्त समितियों को ही चर्चा एवं वार्ता के लिए अधिकृत माना जाए।
फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष रेशम लाल यादव द्वारा जारी पत्र में आरोप लगाया गया है कि कुछ समितियों का गठन नियमों और संगठन के संविधान के विपरीत किया गया है, जिससे श्रमिक प्रतिनिधित्व की पारदर्शिता और वैधानिकता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।New Doc 06-01-2026 13.56
नाथूलाल पाण्डेय पर लंबित शिकायतों का हवाला
पत्र में उल्लेख किया गया है कि कोयला मजदूर सभा के केंद्रीय महामंत्री नाथूलाल पाण्डेय के विरुद्ध आर्थिक अनियमितताओं, संगठनात्मक नियमों के उल्लंघन तथा कथित संविधान-विरोधी गतिविधियों से संबंधित शिकायतें ट्रेड यूनियन कोल फेडरेशन एवं पंजीयक, व्यावसायिक संघ रायपुर के समक्ष विचाराधीन हैं।
फेडरेशन का कहना है कि जब तक इन शिकायतों की जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक उनके द्वारा गठित या नामित समितियों की वैधता स्वतः संदेह के घेरे में बनी रहेगी। ऐसे में उन समितियों को प्रबंधन स्तर पर मान्यता देना भविष्य में गंभीर प्रशासनिक और औद्योगिक विवादों को जन्म दे सकता है।New Doc 05-31-2026 21.47
“असंवैधानिक तरीके से हो रहा समितियों का गठन”
एचएमएस ने आरोप लगाया है कि एसईसीएल के विभिन्न क्षेत्रों में कथित रूप से मनमाने और असंवैधानिक तरीके से समितियों का गठन कर उन्हें श्रमिकों का प्रतिनिधि बताकर प्रबंधन से पत्राचार और वार्ता की जा रही है। संगठन का कहना है कि यदि इस पर समय रहते रोक नहीं लगाई गई तो इससे औद्योगिक संबंधों में अस्थिरता, कर्मचारियों के बीच भ्रम और संगठनात्मक अनुशासन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।New Doc 05-03-2026 15.10
प्रबंधन के सामने रखी गईं तीन बड़ी मांगें
फेडरेशन ने एसईसीएल प्रबंधन से तत्काल प्रभाव से निम्नलिखित कदम उठाने की मांग की है—
1. 31 दिसंबर 2025 से पूर्व गठित एवं विधिवत मान्यता प्राप्त समितियों को ही वार्ता और बैठकों के लिए आमंत्रित किया जाए।
2. लंबित जांच पूरी होने तक विवादित समितियों के साथ किसी भी प्रकार की चर्चा, बैठक या आधिकारिक पत्राचार पर रोक लगाई जाए।
3. एसईसीएल की सभी परियोजनाओं, क्षेत्रों और इकाई कार्यालयों को इस संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।
औद्योगिक शांति और पारदर्शिता का मुद्दा बना केंद्र में
फेडरेशन ने कहा है कि यह केवल संगठनात्मक विवाद का मामला नहीं है, बल्कि औद्योगिक शांति, श्रमिक हितों की रक्षा और वैधानिक प्रक्रियाओं के सम्मान का भी प्रश्न है। यदि बिना वैधता की पुष्टि के समितियों को मान्यता दी जाती है, तो भविष्य में लिए गए निर्णयों की वैधता भी विवादों के घेरे में आ सकती है।
इस पत्र की प्रतिलिपि एसईसीएल मुख्यालय बिलासपुर के वरिष्ठ अधिकारियों, संबंधित क्षेत्रीय प्रबंधन तथा पंजीयक व्यावसायिक संघ रायपुर को भी भेजी गई है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि प्रबंधन इस गंभीर विवाद पर क्या रुख अपनाता है और विवादित समितियों के संबंध में क्या निर्णय लेता है।
जब शिकायतें जांच के दायरे में हैं, तो क्या विवादित समितियों को श्रमिकों का वैध प्रतिनिधि मानकर वार्ता करना उचित होगा?




