कोरबा। छत्तीसगढ़ में मौसम के बदलते मिजाज के साथ ही अब सूरज की तपिश ने लोगों को बेहाल करना शुरू कर दिया है। जिले में लगातार बढ़ रही गर्मी और शुष्क हवाओं को देखते हुए कलेक्टर श्री कुणाल दुदावत के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य विभाग ने आमजन के लिए विस्तृत ‘हेल्थ एडवाइजरी’ जारी की है। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि लू (हीट-स्ट्रोक) न केवल सेहत बिगाड़ सकती है, बल्कि यह जानलेवा भी साबित हो सकती है।
क्यों बढ़ रहा है खतरा?
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) ने बताया कि तेज धूप के कारण शरीर में पानी और आवश्यक खनिज लवणों (नमक) की कमी हो जाती है, जिसे मेडिकल भाषा में डिहाइड्रेशन या हीट-स्ट्रोक कहा जाता है। विशेषकर दफ्तर जाने वाले लोग, किसान और बाजार में खरीदारी करने वाले नागरिक इसका जल्द शिकार हो रहे हैं।
📍 लू से बचाव के ‘गोल्डन रूल्स’ (क्या करें और क्या न करें)
स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे इन उपायों को अपनाकर खुद को सुरक्षित रखें:
- सही पहनावा: घर से बाहर निकलते समय हमेशा सफेद या हल्के रंग के सूती कपड़ों का प्रयोग करें।
- खुद को ढंकें: धूप में निकलते समय सिर, कान और गर्दन को गमछे या टोपी से ढंकना अनिवार्य है।
- हाइड्रेशन: प्यास न लगी हो तब भी पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। अपने साथ पानी की बोतल जरूर रखें।
- पौष्टिक आहार: घर से हमेशा भोजन करके ही निकलें। सुपाच्य भोजन और तरल पदार्थ जैसे छाछ, लस्सी और नींबू पानी का सेवन बढ़ाएं।
- धूप से बचें: दोपहर के समय बेवजह बाहर न निकलें और नंगे पैर चलने से बचें।
इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
अगर आपको नीचे दिए गए लक्षण महसूस होते हैं, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें:
- तेज सिरदर्द, बुखार या उल्टी होना।
- चक्कर आना, कमजोरी या बेहोशी छाना।
- दिल की धड़कन तेज होना और सांस फूलना।
- पसीना आना बंद होना और त्वचा का लाल व सूखा हो जाना।
- प्रभावित व्यक्ति को तुरंत किसी छायादार और ठंडे स्थान पर ले जाएं।
- शरीर के तापमान को कम करने के लिए ठंडे पानी की पट्टियां रखें।
- होश में होने पर ORS घोल, कच्चे आम का पना या ठंडे पेय पदार्थ दें।
- यदि मरीज बेहोश हो, तो उसे कुछ भी पिलाने की कोशिश न करें और तुरंत अस्पताल ले जाएं।
सीएमएचओ ने आश्वस्त किया है कि जिले के मेडिकल कॉलेज सहित सभी सामुदायिक (CHC) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) में जीवन रक्षक दवाइयां और ORS का पर्याप्त स्टॉक भेज दिया गया है। सभी केंद्रों को हीट-स्ट्रोक के मरीजों को प्राथमिकता पर उपचार देने के निर्देश दिए गए हैं।




