दुर्ग-विष्णु गौतम
दुर्ग/ छत्तीसगढ़ के सफ़ेद हांथी कहे जाने वाले जल-जीवन मिशन योजना में एक बार फिर भारी भ्रष्टाचार उजागर हुआ है दुर्ग जिले में रुदा ग्राम पंचायत में लगभग करोड़ रुपये की लागत से बनी पानी की टंकी आज गांव की प्यास बुझाने की जगह महज एक शो का केंद्र बना हुआ है,इस अधूरी टंकी ने सरकारी योजनाओं में व्याप्त लापरवाही और घोटाले की पोल खोलकर रख दी है,आइए जानते हैं, इस पूरी खबर पर एक रिपोर्ट..

दरअसल दुर्ग जिले का ग्राम रुदा, जहाँ जल जीवन मिशन के तहत यह टंकी आधी-अधूरी हालत में बनाई गई है, यहाँ कॉलम, बीम और स्लैब पर ही लगभग पूरा बजट खर्च कर दिया गया लेकिन पानी स्टोर करने के लिए ज़रूरी वर्टिकल वॉल बनाई ही नहीं गई,
नतीजतन यह ढाँचा बगैर पानी के भंडारण क्षमता के बेकार पड़ा है? जब ग्रामीणों ने अधिकारियों से सवाल किया तो उन्हें जवाब मिला कि लिए की टंकी बाद में अलग से बनाई जाएगी,यह साफ दर्शाता है कि अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ है,
यहाँ चौंकाने वाले तथ्य यह भी हैं कि छत्तीसगढ़ में कई जगह ऐसी आधी अधूरी टंकी बनी हुई मिल जाएगी,रुदा गांव में यह टंकी अब युवाओं का सेल्फी पॉइंट बन गई है, शाम होते ही युवा इस पर चढ़कर फोटो खिंचवाते हैं जिससे जान का खतरा बना रहता है, इतना ही नहीं करोड़ रुपये की लागत से बना यह ढाँचा इतना कमजोर है कि हल्का-सा धक्का लगने पर भी हिलने लगता है, इससे निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठते हैं ?
वही इस मामले में रुदा गांव के सरपंच कहते है कि अधिकारियों ने जानबूझकर भ्रष्टाचार किया है,अगर टंकी सही से बनती तो गर्मी के दिनों में ग्रामीणों को पानी की समस्या से राहत मिलती,परन्तु आज भी हमें दूर-दूर से पानी लाना पड़ रहा है जिम्मेदार आंखमूंद कर बैठे है तभी तो ठेकेदार अपनी मनमानी कर रहा है,
यह मामला सिर्फ ग्राम रूदा का नहीं है दुर्ग के ग्राम नगपुरा में भी जल जीवन मिशन के तहत बनी टंकी आज भी अधूरी है,यह मनमानी खुली लूट का प्रतीक बन गया है,ग्रामीण अब इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जाँच की मांग कर रहे हैं ताकि दोषियों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई हो सके ,
अब देखना यह है कि क्या प्रशासन इस मामले में कोई ठोस कदम उठा काम पूरा करवाता है या फिर यह अधूरी टंकी भी अन्य सरकारी योजनाओं की तरह भ्रष्टाचार का एक और स्मारक बनकर रह जाएगी……



