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संदिग्ध परिस्थितियों में मिला किसान की लाश,पुलिस कर रही मामले की जांच…..

कोरबा /कोरबा जिले में मानव-हाथी संघर्ष की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं, यहाँ जिले में कटघोरा वनमंडल के संवेदनशील पसान क्षेत्र में हाथियों की मौजूदगी के बीच एक किसान की मौत हो गई है,मृतक की पहचान 42 वर्षीय प्रताप सिंह के रूप में हुई है,बताया जा रहा है कि किसान अपने खेत में लगी धान की फसल को जंगली हाथियों से बचाने के लिए उन्हें खदेड़ने निकला था,

इसी दौरान हाथी के हमले से वह गंभीर रूप से घायल हो गया, उन्हें उपचार के लिए बिलासपुर स्थित सिम्स अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई,घटना के बाद इलाके में शोक और चिंता का माहौल है, ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में जंगली हाथियों की लगातार आवाजाही के कारण खेती-किसानी प्रभावित हो रही है,दूसरी ओर खेतों में धान की फसल पकने के करीब पहुंच गई है,ऐसे समय में हाथियों द्वारा फसलों को नुकसान पहुंचाए जाने से किसानों की चिंता बढ़ गई है,

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार पसान क्षेत्र के रहने वाले किसान प्रताप सिंह को अपने खेत में खड़ी धान की फसल की चिंता सता रही थी,क्योकि इलाके में जंगली हाथियों की लगातार आवाजाही हो रही है,हाथी खेतों में पहुंचकर धान की फसल को खा रहे हैं और पैरों तले रौंदकर नुकसान पहुंचा रहे हैं,

इसी बीच किसान प्रताप सिंह देर रात हाथियों को खेतों से दूर भगाने के लिए जंगल की ओर गए थे,बताया जा रहा है कि उस समय इलाके में काफी अंधेरा था,जंगल में हाथी की मौजूदगी के दौरान किसान अचानक मुंह के बल जमीन पर गिर पड़े और गंभीर रूप से घायल हो गए, हालांकि किसान को हाथी ने सीधे कुचला या हाथी से बचने के दौरान गिरने से चोट आई, इसकी स्पष्ट पुष्टि नहीं हो सकी है,

घटना में गंभीर रूप से घायल प्रताप सिंह को स्थानीय लोगों और परिजनों की मदद से उपचार के लिए बिलासपुर के सिम्स अस्पताल पहुंचाया गया,उनकी हालत गंभीर बताई जा रही थी,अस्पताल में उपचार के दौरान किसान ने दम तोड़ दिया,किसान की मौत की खबर सामने आने के बाद परिवार और आसपास के ग्रामीणों में शोक फैल गया,

यह घटना ऐसे समय में सामने आई है, जब क्षेत्र में धान की फसल तैयार होने के करीब है और किसान उसे सुरक्षित रखने की कोशिश कर रहे हैं, बताया जा रहा कि कोरबा जिले के पसान और आसपास के वन क्षेत्रों में इन दिनों करीब 52 जंगली हाथियों का दल विचरण कर रहा है,

हाथियों की मौजूदगी के कारण आसपास की ग्रामीण बस्तियों और खेतों में लगातार खतरा बना हुआ है, हाथियों का यह दल भोजन और पानी की तलाश में जंगल से निकलकर खेतों तथा आबादी वाले इलाकों की ओर पहुंच रहा है,ग्रामीणों के अनुसार, हाथी खेतों में खड़ी धान की फसल को नुकसान पहुंचा रहे हैं,कई स्थानों पर फसल खाने के साथ उसे रौंदकर बर्बाद करने की घटनाएं सामने आ रही हैं। हाथियों की गतिविधियों के कारण किसानों को रात के समय अपने खेतों की सुरक्षा की चिंता बनी रहती है। हालांकि, जंगली हाथियों के नजदीक जाना बेहद खतरनाक साबित हो सकता है,

फसल पकने से पहले हाथियों ने बढ़ाई मुश्किल छत्तीसगढ़ के कई क्षेत्रों में दशहरा के बाद जल्दी पकने वाली धान की किस्मों की कटाई शुरू होने लगती है, ऐसे में खेतों में तैयार फसल किसानों के लिए सालभर की मेहनत का परिणाम होती है,लेकिन कोरबा के वनांचल क्षेत्रों में हाथियों की लगातार आवाजाही ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है,एक ओर किसान अपनी फसल बचाने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जंगली हाथियों के कारण जान का खतरा भी बना हुआ है,

हाथियों द्वारा खेतों में घुसकर धान की फसल को नुकसान पहुंचाने से किसानों को आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है, वन विभाग की टीमें हाथियों की गतिविधियों पर रख रहीं नजर घटना की जानकारी सामने आने के बाद वन विभाग और स्थानीय पुलिस प्रशासन सक्रिय हो गया है,