रायपुर /पेपर लीक के ढेरों मामले सुने होंगे ,लेकिन छत्तीसगढ़ वाला केस सुनकर पुलिस अधिकारियों के भी होश उड़ गए हैं,एक प्राइवेट कॉलेज के प्रोफेसर साहब ने यूनिवर्सिटी की परीक्षा का पेपर लीक करने के लिए मेडिकल में इस्तेमाल होने वाले छोटे से ‘एंडोस्कोपिक कैमरे’ और सुई की मदद ली. सीलबंद लिफाफे को बिना फाड़े और बिना उसकी सील को नुकसान पहुंचाए अंदर का पूरा प्रश्नपत्र बाहर आ गया और परीक्षा से ठीक दो घंटे पहले स्टूडेंट्स के पास पहुंच गया,

मामला रायपुर के इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) का है, जहां 20 अगस्त को होने वाली बीएससी एग्रीकल्चर सेकंड ईयर की परीक्षा का पेपर लीक हो गया. जब यूनिवर्सिटी और पुलिस की साइबर विंग ने मामले की जांच शुरू की तो केवल 36 घंटे के अंदर पूरी साजिश का पर्दाफाश हो गया. पुलिस ने दुर्ग के एक कॉलेज के प्रोफेसर योगेश सोनकेसरिया समेत 5 स्टूडेंट्स को सलाखों के पीछे भेज दिया है. जानिए कि कैसे इस ‘हाई-टेक’ प्रोफेसर ने सुई और कैमरे के दम पर पूरे सिस्टम को चकमा देने की कोशिश की.
पेपर लीक मामले के मुख्य आरोपी 38 वर्षीय योगेश सोनकेसरिया दुर्ग के ‘भारती एग्रीकल्चर कॉलेज’ में पढ़ाते हैं. यूनिवर्सिटी के नियमों के तहत प्रोफेसर ही मुख्य सेंटर से प्रश्नपत्रों के पैकेट कलेक्ट करते हैं और आंसर शीट जमा करते हैं. 17 अगस्त को योगेश रायपुर के जोरा स्थित एग्रीकल्चर कॉलेज में आंसर शीट जमा करने गए थे. वहां से उन्होंने 20 अगस्त को होने वाली परीक्षा के सीलबंद लिफाफे ले लिए. बाकी पेपर तो उन्होंने अपने कॉलेज के लॉकर में रख दिए. लेकिन एंटोमोलॉजी (कीट विज्ञान) विषय का लिफाफा अपने घर ले गए.
घर पहुंचकर प्रोफेसर सोनकेसरिया ने तिकड़म लगाई. उन्होंने 2,500 रुपये में बारीक एंडोस्कोपिक कैमरा खरीदा- डॉक्टर शरीर के अंदरूनी हिस्से देखने के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं. प्रोफेसर ने सुई और एक नुकीले औजार की मदद से लिफाफे के कोने में बेहद बारीक छेद किया. फिर उस छोटे से छेद से कैमरे की पतली केबल अंदर घुसा दी और फोन में पूरे प्रश्नपत्र की तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्ड कर लिए. इसके बाद हाथ से सवाल नोट किए और लिफाफे को वापस फेविकॉल से चिपका दिया, जिससे किसी को शक न हो. उन्होंने यह पेपर अपने ही कॉलेज के स्टूडेंट अजय नायक को 11,000 रुपये में बेच दिया.
20 अगस्त की सुबह 10 बजे से 28 कॉलेजों के करीब 1,200 स्टूडेंट्स की परीक्षा होनी थी. लेकिन सुबह 8:41 बजे ही कवर्धा एग्रीकल्चर कॉलेज को एक गुमनाम ईमेल मिला, जिसमें पेपर लीक की बात कही गई. देखते ही देखते WhatsApp ग्रुप्स पर प्रश्नपत्र के स्क्रीनशॉट तेजी से वायरल होने लगे. यूनिवर्सिटी प्रशासन ने वायरल पर्चे का मिलान ओरिजिनल पेपर से किया तो सवाल हूबहू वही निकले. आनन-फानन में परीक्षा रद्द कर दी गई और रायपुर के तेलीबांधा थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई.
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और साइबर सेल के 100 से ज्यादा जवानों की टीम बनाई गई. साइबर विंग ने WhatsApp मेसेज, सोशल मीडिया अकाउंट्स और लोकेशन डेटा को ट्रैक करना शुरू किया. सबसे पहले दुर्ग के छात्र अनुज मिंज का सुराग मिला. सख्ती से पूछताछ में ताश के पत्तों की तरह एक-एक कर राज खुलते चले गए और पुलिस सीधे मास्टरमाइंड प्रोफेसर योगेश सोनकेसरिया तक पहुंच गई. पुलिस ने 11,000 रुपये कैश, 6 मोबाइल, एंडोस्कोपिक डिवाइस, कनेक्टिंग केबल और सुई-धागा बरामद कर लिया है.अब रद्द हुई परीक्षा सितंबर के पहले हफ्ते में नए सुरक्षा नियमों के साथ दोबारा कराई जाएगी.




