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जंगलों का मौन प्रहरी मॉटल्ड वुड आउल उपचार के बाद लौटा प्राकृतिक आवास, वन विभाग की पहल सफल

कोरबा। रजगामार क्षेत्र में कौवों के हमले से घायल हुए मॉटल्ड वुड आउल (उल्लू) को वन विभाग और नोवा नेचर की संयुक्त पहल से नया जीवन मिला। स्थानीय निवासी होमेश की सूचना पर वन विभाग की रेस्क्यू टीम एवं जितेंद्र सारथी ने पक्षी को सुरक्षित रेस्क्यू किया। प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्री अरुण पांडे, मुख्य वन संरक्षक श्री मनोज पाण्डेय, वनमण्डलाधिकारी श्रीमती प्रेमलता यादव के निर्देश तथा उप वनमण्डलाधिकारी सूर्यकांत सोनी एवं श्रीराम सिंह राठिया के मार्गदर्शन में वन परिक्षेत्र अधिकारी मृत्युंजय शर्मा के नेतृत्व में घायल पक्षी का पशु चिकित्सक डॉ. अनिकेत ने उपचार किया। नियमित ड्रेसिंग और देखभाल के बाद पूरी तरह स्वस्थ होने पर फॉरेस्ट बिट ऑफिसर कमलेश कुम्हार एवं जितेंद्र सारथी ने उसे पुनः प्राकृतिक जंगल में छोड़ दिया। यह सफल रेस्क्यू वन विभाग और सामाजिक संस्था के समन्वित संरक्षण प्रयासों का उदाहरण है।

मॉटल्ड वुड आउल (Strix ocellata) भारतीय वनों का महत्वपूर्ण रात्रिचर शिकारी पक्षी है, जो चूहों, छिपकलियों, मेंढकों और अन्य छोटे जीवों का शिकार कर पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है। उत्कृष्ट दृष्टि, तीव्र श्रवण क्षमता और लगभग निःशब्द उड़ान इसकी प्रमुख विशेषताएँ हैं। यह प्रजाति वैश्विक स्तर पर Least Concern (LC) श्रेणी में है, लेकिन भारत में इसे वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 के तहत सर्वोच्च कानूनी संरक्षण प्राप्त है। विशेषज्ञों के अनुसार पुराने वृक्षों की कटाई, प्राकृतिक आवासों का विनाश, अंधविश्वास के कारण शिकार और कीटनाशकों का अत्यधिक उपयोग इसके लिए प्रमुख खतरे हैं। उनका मानना है कि ऐसे रात्रिचर पक्षियों का संरक्षण केवल एक प्रजाति की सुरक्षा नहीं, बल्कि पूरे वन पारिस्थितिकी तंत्र और कृषि जैव विविधता को सुरक्षित रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।