तपती धूप-सूखी धरती-फटे हुए पहाड़ और उनके बीच में पानी की एक-एक बूंद के लिए संघर्ष करती जिंदगी…
मध्यप्रदेश के खरगोन की यह तस्वीर सिस्टम के गाल पर करारा तमाचा है,एक तरफ ‘हर घर जल’ और विकास के बड़े-बड़े दावे हैं, तो दूसरी तरफ एक घड़ा पानी के लिए जान जोखिम में डालती ये मासूम जिंदगियां।
सरकार से सीधे सवाल:- कागजों पर तैरता ‘जल जीवन मिशन’ इस पथरीली खाई तक क्यों नहीं पहुँचा?
आज़ादी के दशकों बाद भी देश की जनता पानी जैसी बुनियादी ज़रूरत के लिए कब तक अपनी जान दांव पर लगाती रहेगी?
चुनाव खत्म होते ही नेताओं के वादे और प्रशासन की जवाबदेही कहाँ गायब हो जाती है?
यह सिर्फ एक तस्वीर नहीं, बल्कि खोखले वादों और प्रशासनिक विफलता का जीता-जागता सबूत है।
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