रायगढ़ / रायगढ़ जिले में घरघोड़ा क्षेत्र स्थित एनटीपीसी तलाईपल्ली परियोजना में एक बार फिर मजदूरों और चालकों की सुरक्षा तथा बुनियादी अधिकारों की अनदेखी का गंभीर मामला सामने आया है,यहाँ परियोजना में 16 चक्का भारी वाहन चलाने वाले झारखंड के एक चालक विजय पासवान की ड्यूटी के दौरान अचानक तबीयत बिगड़ने और समय पर समुचित चिकित्सीय सहायता न मिलने के कारण जान चली गई,

इस घटना के बाद स्थानीय मजदूरों व साथी वाहन चालकों और परिजनों में कंपनी प्रबंधन की कार्यशैली को लेकर भारी आक्रोश है,यहाँ सैकड़ों की संख्या में आक्रोशित चालक और ग्रामीण कार्यस्थल पर धरने पर बैठ गए हैं और प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर रहे हैं,
मिली जानकारी के अनुसार ऑल झारखंड ड्राइवर ट्रेड यूनियन से जुड़े साथी चालक हजारी सिंह ने घटना के पूरे घटनाक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि विजय पासवान रात 10 बजे अपनी सामान्य नाइट शिफ्ट ड्यूटी पर चढ़ा था और पूरी रात वाहन चलाने के बाद तड़के लगभग 4 बजे उसने सुपरवाइजर को अपनी तबीयत गंभीर रूप से खराब होने की सूचना दी,
चालक विजय को कमरे पर भेज दिया गया, लेकिन प्रबंधन और सुपरवाइजर द्वारा उसे तत्काल अस्पताल ले जाने की जहमत नहीं उठाई गई और जब तक उसे स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराई जाती तब तक बहुत देर हो चुकी थी और उसने दम तोड़ दिया था, साथी चालकों का आरोप है कि विजय पासवान ने दो दिन पहले ही अपनी अस्वस्थता का हवाला देते हुए इलाज के लिए घर जाने हेतु छुट्टी की गुहार लगाई थी, परंतु कंपनी के जिम्मेदार अधिकारियों ने उसकी छुट्टी खारिज कर दी और उसे जबरन काम करने पर मजबूर किया,
प्रदर्शनकारी चालकों का कहना है कि एनटीपीसी तलाईपल्ली परियोजना में काम करने वाले बाहरी चालकों के साथ बंधुआ मजदूरों जैसा व्यवहार किया जाता है, लगातार 12-12 घंटे काम का अत्यधिक दबाव बनाया जाता है और बीमार होने पर भी राहत नहीं दी जाती ,सुपरवाइजरों और निचले प्रबंधन द्वारा बात-बात पर गाली-गलौज, मानसिक प्रताड़ना और नौकरी से निकालने की धमकियां देना आम बात हो चुकी है,
मजदूरों का कहना है कि यहां श्रम कानूनों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं और इंसानी जिंदगी की कोई कद्र नहीं समझी जा रही है,घटना की सूचना पाकर मौके पर पहुंचे कुटुमु पंचायत के मुखिया ने बताया कि उन्हें शाम ढलते ही अपने गांव के चालक विजय पासवान की तबीयत खराब होने और बाद में मौत की मनहूस खबर मिली,इसके बाद जब वे चालकों के साथ शांतिपूर्ण धरने पर बैठे, तो कंपनी के एक सुपरवाइजर ने आकर बेहद असंवेदनशील लहजे में बात की और केवल 1 लाख रुपये मुआवजे की पेशकश की,
मुखिया और परिजनों ने इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज करते हुए इसे पीड़ित परिवार के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा बताया,उन्होंने कहा कि 1 लाख रुपये तो शव को पैतृक गांव तक ले जाने और अंतिम संस्कार के खर्च में ही समाप्त हो जाएंगे,मृतक अपने पीछे भरा-पूरा परिवार और कई आश्रित छोड़ गया है, जिनके भरण-पोषण का कोई अन्य सहारा नहीं है, परिजनों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे किसी सुपरवाइजर स्तर के कर्मचारी से नहीं बल्कि सीधे कंपनी के शीर्ष प्रबंधन और मालिक से सम्मानजनक व नियमानुसार मुआवजे की बात करेंगे,
वही धरने पर डटे ऑल झारखंड ड्राइवर ट्रेड यूनियन और ग्रामीणों ने रायगढ़ जिला प्रशासन, श्रम विभाग और एनटीपीसी के उच्चाधिकारियों से इस पूरे मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है,प्रदर्शनकारियों का साफ कहना है कि जब तक मृतक विजय पासवान के आश्रितों को सम्मानजनक आर्थिक मुआवजा, बीमा राशि और परिवार के एक सदस्य को रोजगार का ठोस आश्वासन नहीं मिलता, तब तक धरना और विरोध प्रदर्शन समाप्त नहीं होगा,फ़िलहाल खदान क्षेत्र में वाहनों के पहिए थमे हुए हैं और स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है…




