सक्ती /रायगढ़ बिलासपुर के बीच अमानक व घटिया स्तर पर बने हाई-वे 49 पर आये दिन होनेवाले सड़क हादसे में बेगुनाह लोग अपनी जान गवा रहें है,अब ऊपर से यहाँ सक्ती जिले में टोल प्लाजा के कर्मचारियों की अपनी ही मनमानी चल रही है,यहाँ टोल कर्मचारियों ने अपनी कमाई बढाने के लिए मुख्य मार्ग से लगी गांव की सड़क पर खंभा गड़ाकर रोड को ही बाधित कर लोगों को टोल प्लाजा से गुजरने मजबूर किया,जिससे आसपास के लोगों को खासे परेशानी का सामना करना पड़ रहा है,
वहीं इस मामले की जानकारी मिलते ही जिला कलेक्टर ने कहा है कि ये सब बर्दाश्त नहीं करेंगे और उन्होंने तत्काल कार्यवाई करते हुए अपर कलेक्टर व तहसीलदार सहित पीडब्ल्यूडी की टीम को मौके पर भेजा और खंभे को बीच मार्ग से हटवाकर रास्ते को फिर से चालू करवा आम जन को राहत पहुचाई,


दरअसल सक्ती से बाराद्वार मुख्य मार्ग NH 49 में ग्राम जेठा में टोल प्लाजा लगभग 1 साल से संचालित है,इस टोल प्लाजा के बगल में एसपी कार्यालय, जिला पंचायत कार्यालय एवं कलेक्टर कार्यालय भी जुड़ा हुआ है,
जिसके चलते सक्ती की ओर से जाने वाले लोगों को एवं बाराद्वार की तरफ से आने वाले लोगों को टोल प्लाजा से गुजरकर इन कार्यालयों में जाना पड़ता है बेवजह लोगों के जेब पर इसका असर पढ़ रहा था।
टोल प्लाजा से लगकर ग्रामीण बाईपास सड़क भी है जो कलेक्टर कार्यालय के चारों ओर बनी है,जिसका स्थानीय लोग उपयोग कर इन कार्यालय में आना जान करते हैं,जो स्थानीय जनता को इस टोल प्लाजा के अनावश्यक खर्चे से राहत दिलाता है,इस सड़क का उपयोग लोग अक्सर कलेक्टर-एसपी कार्यालय या जिला पंचायत कार्यालय जाने के लिए करते हैं,
मगर टोल प्लाजा के कर्मचारियों को इस सड़क से नुकसान होता दिखा और इन्होंने सारे नियम कानून को ताक में रखकर इस सड़क को ही लोहे के खंभे लगाकर ब्लॉक कर दिया ताकि आसपास के लोकल व्यक्ति भी कलेक्टर, एसपी कार्यालय जाने के लिए टोल नाका से होकर गुजरे और उनकी जेब खाली कर सके।
सूत्रों से पता चला है कि कि इस पूरे मामले में कई जनप्रतिनिधियों का संरक्षण मिला हुआ है,जिसके शह में टोल प्लाजा के संचालक द्वारा यह अवैध कार्य किया गया है,वहीं राजधानी के एक बड़े नेता का संरक्षण भी इसमें शामिल है जिसके कारण आम पब्लिक को परेशान किया जा रहा है।
आपको बता दें कि करीब माह भर पहले बिलासपुर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का दौरा सक्ती की तरफ हुआ था, उस समय उन्होंने कलेक्टर को इस टोल प्लाजा को हटाने के लिए आवश्यक पत्राचार करने के लिए कहा था,
जिसके बाद कलेक्टर ने भी एनएचअथॉरिटी को टोल प्लाजा को हटाने के लिए पत्र लिखा परंतु राजनीतिक संरक्षण और दबाव के चलते इस टोल प्लाजा को हटाने की कार्रवाई फिलहाल ठंडे बस्ती में जाते हुए दिख रही है।



