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मुझे किस बात की चिंता ? यदि ये आरोप प्रभु की इच्छा से लगे हैं तो इन्हीं की कृपा से सत्य भी सामने आएगा और वही इन्हें दूर करेंगे-चंपत राय

विविध /अयोध्या/अयोध्या में चंपत राय ने अपने निकट सहयोगियों से अत्यंत भावुक स्वर में कहा कि अयोध्या में उन्हें जो सेवा मिली थी, वह लगभग पूर्ण हो चुकी है, प्रभु श्रीराम का भव्य मंदिर बन चुका, किंतु वे अपने जीवन की इस तपस्या पर किसी प्रकार का कलंक लगने नहीं देंगे।

सूत्रों के अनुसार, उन्होंने आरोपी बताए जा रहे टिन्नू यादव का उल्लेख करते हुए गहरा दुःख व्यक्त किया और कहा कि जिस व्यक्ति पर उन्होंने विश्वास किया, उसी से उन्हें ऐसी पीड़ा मिली जिसकी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी।
बताया जाता है कि तीर्थ क्षेत्र पुरम में उनका निवास अत्यंत सादा है, एक साधारण कमरे में, बिस्तर के समीप भगवान श्रीराम की प्रतिमा विराजमान है, आरोपों के बाद जब उनके सहयोगियों ने उनके स्वास्थ्य और मनःस्थिति को लेकर चिंता व्यक्त की,
तब उन्होंने श्रीराम की प्रतिमा की ओर संकेत करते हुए शांत भाव से कहा— “मुझे किस बात की चिंता? यदि ये आरोप प्रभु की इच्छा से लगे हैं, तो इन्हीं की कृपा से सत्य भी सामने आएगा और वही इन्हें दूर करेंगे।”
यह कथन वास्तव में उनके विचारों को प्रतिबिंबित करता है, यह उनके ईश्वर-विश्वास, धैर्य और न्याय की प्रतीक्षा करने की मनोस्थिति को दर्शाता है।
बात सिर्फ चंदा ‘चोरी’ की नहीं, फैलाये जा रहे इस नैरेटिव के पीछे छिपे बड़े ‘खेल’ को समझिए- पिछले कुछ दिनों से मीडिया, राजनीति और सोशल मीडिया पर एक ही शोर है, मंदिर में चोरी हो गई, चोरों को नहीं पकड़ा भक्त ठगे गए, अचानक वो लोग भी ‘रामभक्त’ बनकर छाती कूट रहे हैं, जो कल तक श्री राम को काल्पनिक बताते थे और कहते थे कि मंदिर बनने से देश का ताना-बाना टूट जाएगा…!!
लेकिन क्या यह वाकई सिर्फ एक मामूली चोरी का मामला है ? या इसके पीछे सनातन को बदनाम करने की कोई गहरी अंतरराष्ट्रीय साजिश है? आइए सच को खंगालते हैं..!!
आजादी के बाद से दशकों तक दुनिया के सामने भारत की पहचान सिर्फ ‘ताजमहल’ को बनाकर रखी गई विदेशी मेहमान आते तो उन्हें ताजमहल ले जाया जाता, पीएम तोहफे में ताजमहल की प्रतिक  देते ऐसा दिखाया गया मानो भारत की हजारों साल पुरानी सनातनी विरासत तिरुपति, काशी, महाकाल, मीनाक्षी मंदिर का कोई अस्तित्व ही न हो..!!
सरकार बदली तो नैरेटिव बदला दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा बनी, विदेशी मेहमानों को गीता और भारत की क्षेत्रीय सांस्कृतिक धरोहरें भेंट की जाने लगीं नतीजतन, पर्यटकों का रुख मुड़ा और एक खास इकोसिस्टम का ‘अहंकार’ चोटिल होने लगा..!!
अयोध्या का अभूतपूर्व वैभव और ‘उनका’ डर- असंभव दिखने वाला राम मंदिर का सपना सच हुआ बात सिर्फ मंदिर बनने की नहीं थी, बात थी वहां उमड़े जनसैलाब की सालाना 30 करोड़ से ज्यादा पर्यटक इतना रेवेन्यू और इतनी भव्यता कि पूरी दुनिया अब भारत को ‘अयोध्या’ के नाम से जानने लगी,
जब भारत की वैश्विक पहचान इस्लामिक आर्किटेक्चर से बदलकर ‘सनातनी गौरव’ में तब्दील होने लगी, तो अंतरराष्ट्रीय लॉबी में खलबली मच गई, अगर घर की कामवाली बाई चोरी करे, तो पुलिस बाई को पकड़ती है,
मकान मालिक को चोर नहीं कहती अयोध्या में कुछ कर्मचारियों ने गड़बड़ी की, वे पकड़े गए, जेल गए लेकिन नैरेटिव देखिए चोर सीधे ट्रस्ट और सनातनियों को ठहराया जा रहा है ?
दक्षिण के हजारों मंदिरों का अरबों का चढ़ावा सरकारी नियंत्रण में है, जिसका इस्तेमाल दूसरे धर्मों के लिए भी होता आया है, तब किसी को ‘चोरी’ नजर नहीं आती लेकिन अयोध्या में तिल का ताड़ बनाया जा रहा है..!!
इस पूरे हंगामे के पीछे करोड़ों की फंडिंग से चल रहा एक ही एजेंडा है अयोध्या को ‘विवादित और असुरक्षित’ साबित करो भक्तों के मन में ये डालो कि वहां जाना फिजूल है, ताकि वहां का पर्यटन और रेवेन्यू ठप हो जाए रामलला की भव्यता को कमतर करके दिखाया जा सके, ताकि भारत की पहचान फिर से सिर्फ शाहजहां के दौर पर आकर टिक जाए..!!
सनातनी समाज को अब सावधान होना होगा, यह लड़ाई चढ़ावे की चोरी की है ही नहीं यह लड़ाई इस बात की है कि विश्व पटल पर भारत की पहचान भगवान राम से होगी या शाहजहां से आज अगर राम मंदिर की भव्यता से वैश्विक लॉबी इतनी डरी हुई है, तो सोचिए कल जब काशी और मथुरा अपने पूर्ण वैभव में होंगे, तब सनातन का परचम कहाँ होगा यही डर उनसे यह सब करवा रहा है..!!
विपक्ष के मोहरों और टूलकिट के जाल में फंसकर आपस में लड़ने के बजाय, असली शत्रु और उनकी क्रोनोलॉजी को पहचानिए सतर्क रहिए, संगठित रहिए..
जय श्री राम! 🚩
साभार 🙏