गड़े धन और नरबलि की अफवाह झूठी, शराब में जहर मिलाकर रची हत्या की साजिश, 8 रहस्यमयी मौतों का पुलिस ने खोला राज, आरोपी रामसहाय जायसवाल गिरफ्तार,
बलौदा बाजार / बलौदाबाजार जिले के खर्वे गांव में पिछले तीन महीनों के भीतर हुई आठ लोगों की संदिग्ध मौत के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है,पुलिस ने इस मामले के मुख्य संदिग्ध रामसहाय जायसवाल को हिरासत में ले लिया है,

पुलिस जांच में गांव का ही 46 साल का रामसहाय जायसवाल सीरियल किलर के रूप में सामने आया है, आरोपी ने पुरानी रंजिश, गाली-गलौज, कर्ज, चारित्रिक संदेह और टोना-टोटका के शक में अपने परिचित आठ लोगों की हत्या करना स्वीकार किया है,
पुलिस सूत्रों के अनुसार, कड़ाई से की गई पूछताछ में आरोपी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है, आरोपी ने बताया कि वह गांव के लोगों के साथ बैठकर शराब पीता था और मौका देखकर उनकी शराब में सुहागा नामक जहरीला पदार्थ मिला देता था,

जहरीली शराब पीने के बाद जब लोगों की तबीयत बिगड़ती, तो शक से बचने के लिए आरोपी खुद उन्हें अस्पताल पहुंचाने में मदद करता और अंतिम संस्कार में भी शामिल होता था,इसी वजह से लगातार हो रही मौतों के बावजूद लंबे समय तक किसी को उस पर संदेह नहीं हुआ।
कसडोल थाना पुलिस ने आरोपी के खिलाफ हत्या और जहर देने की विभिन्न धाराओं के तहत कुल 9 प्राथमिकियां (FIR) दर्ज की हैं,ग्रामीणों और मृतकों के परिजनों का आरोप है कि रामसहाय जायसवाल लोगों से छोटी-छोटी बातों या मजाक को लेकर दुश्मनी पाल लेता था,
पीड़ित परिवारों के अनुसार, जिन लोगों की भी मौत हुई है, उन्हें प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रामसहाय द्वारा ही शराब उपलब्ध कराई गई थी, शराब पीने के कुछ समय बाद ही पीड़ितों की तबीयत बिगड़ती थी और अस्पताल ले जाने से पहले या इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो जाती थी,
इस घटनाक्रम ने इलाके में भारी सनसनी फैला दी है,ग्रामीणों में यह चर्चा और भय का विषय बना हुआ है कि आरोपी कथित तौर पर ‘गड़े धन’ को प्राप्त करने के लिए अंधविश्वास के चलते ’21 लोगों की बलि’ देने की योजना पर काम कर रहा था,
जांच के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि रामसहाय जायसवाल ने चूहे मारने की दवा के नाम पर सुहागा नामक जहरीला पदार्थ लिया था, शुरू में आरोपी पुलिस को गुमराह करता रहा, लेकिन लंबी पूछताछ के बाद उसने एक-एक हत्या की बात स्वीकार कर ली।
उसने बताया कि पुरानी रंजिश, गाली-गलौज, कर्ज, पत्नी पर बुरी नजर रखने और टोना-टोटका के शक के चलते उसने लोगों को निशाना बनाया,
दरअसल जिले के खर्वे गांव में 6 फरवरी से 14 मई के बीच बद्री पटेल, बुठालू साहू, छत्तूराम, बुधराम जायसवाल, विनोद कुमार, गजानंद मांझी, चैतूराम साहू और महेतरू राम की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी,
लगातार हो रही मौतों से ग्रामीण दहशत में थे और पूरे गांव में तंत्र-मंत्र, गड़ा धन और नरबलि की चर्चाएं होने लगी थीं,बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने कसडोल पुलिस से मामले की जांच की मांग की थी।ग्रामीणों की शिकायत के बाद पुलिस ने सात शवों का उत्खनन कराया और पोस्टमार्टम के लिए रायपुर मेकाहारा भेजा।
एक मृतक बुधराम जायसवाल का अंतिम संस्कार हो चुका था,डॉक्टरों की विशेष टीम ने पोस्टमार्टम कर डीएनए, विसरा और अन्य नमूने सुरक्षित रखे हैं,पुलिस ने तकनीकी साक्ष्य जुटाने के साथ ग्रामीणों से भी लगातार पूछताछ की,
पुलिस के मुताबिक आरोपी ने सबसे पहले जहर का प्रयोग एक कुत्ते पर किया था, परीक्षण सफल होने के बाद उसने शराब में जहर मिलाकर अपने परिचितों को पिलाना शुरू किया,आरोपी लोगों के साथ बैठकर शराब पीता था और उन्हें जहर मिली शराब दे देता था।
किसी को शक न हो, इसलिए वह खुद पीड़ितों को अस्पताल पहुंचाने और उनके अंतिम संस्कार में शामिल होने का काम भी करता था, 14 अप्रैल को कार्तिक कुम्हार को भी आरोपी ने जहर मिली शराब पिलाई थी, तबीयत बिगड़ने पर परिजन उसे अस्पताल ले गए और उसकी जान बच गई।
कार्तिक के बयान और ग्रामीणों के संदेह के बाद पुलिस जांच की दिशा बदली,इसके बाद एक-एक कड़ी जुड़ती चली गई और आखिरकार पूरे मामले का खुलासा हो गया, वही पुलिस का कहना है कि वैज्ञानिक जांच, तकनीकी साक्ष्य और आरोपी की स्वीकारोक्ति के आधार पर इस बहुचर्चित मामले का खुलासा हुआ है।




