रायगढ़/ रायगढ़ जिले में घरघोड़ा के ICICI बैंक में मृत व्यक्ति की फिक्स डिपॉजिट की 30 लाख रूपए राशि को फर्जी तरीके से एटीएम बना कर आहरण कर लेने का आश्चर्यचकित मामला सामने आया है, दरअसल मामले को लेकर मृतक की पत्नी ने तकरीबन एक वर्ष पूर्व घरघोड़ा थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी,

लेकिन आज पर्यंत किसी प्रकार की कार्रवाई थाने से नहीं किये जाने पर उसने पुलिस अधीक्षक से इस संबंध में लिखित शिकायत देते हुए बैंक के अधिकारियों की भी इसमें मिली भगत होने की आशंका जताते हुए मामले में जांच की मांग की है, मिली जानकारी के अनुसार तमनार तहसील के अतर्गत ग्राम केराखोल निवासी धनुर्जय राठिया को भू-अर्जन में बड़ी रकम मिली थी।
उक्त रकम में से उसने तीस लाख रूपए आईसीआईसीआई बैंक की घरघोड़ा शाखा में फिक्स डिपॉजिट करवाया था, वहीं 9 जून 2020 को धनुर्जय राठिया की मृत्यु हो गई थी, इधर पति की मौत के बाद उसकी पत्नी सिरमती राठिया तथा उसकी बेटी आईसीआईसीआई बैंक घरघोड़ा गये थे जिन्होंने धनुर्जय राठिया की मौत होने की वजह से उसके द्वारा कराये गये फिक्स डिपॉजिट को क्लोज कर खाते में जमा पैसे नॉमिनी को देने कि बात कही।
सिरमती राठिया के अनुसार उस बैंक के परिवार वालों को यह कह कर गुमराह कर दिया कि फिक्स डिपाजिट की तय सीमा पूरी नहीं हुई है, लिहाजा आपको यह पैसा नहीं मिल सकता। ऐसे में राठिया परिवार ने समय पूरा होने का इंतजार किया और जब एफडी मैच्योर हो गई तो फिर से उन्होंने बैंक में संपर्क साधा जिस पर बैंक के अधिकारियों द्वारा अलग-अलग बात करते हुए उन्हे गुमराह किया जाता रहा।
इसी बीच बैंक के चक्कर लगा कर परेशान राठिया परिवार को जानकारी मिली कि मृतक धनुर्जय राठिया के एफडी में जमा रकम 30 लाख रूपए एटीएम का इस्तेमाल कर निकाल लिए गए है,इससे स्पष्ट है कि बैंक के अधिकारियों की मिलीभगत से ही 30 लाख रुपए का फर्जी तरीके से अहरण हुआ है,
चूंकि धनुर्जय की मौत हुई तब बैंक को सारी जानकारी दी गई तब ही नियमानुसार बैंक प्रोसेस करता और नॉमिनी के नाम एफडी ट्रांसफर करता तो शायद रकम आहरण नहीं होती। शक की सुई अधिकारियों की ओर इस वजह से भी घूम रही है कि जब खाताधारी की मौत होने की जानकारी मिलने के बावजूद अकाउंट को चालू रखा गया और एटीएम भी एक्टीव रहा तथा परिजनों को भी वास्तविक बात न बता कर लगातार गुमराह किया जाता रहा हैं।
वहीं मृतक की पत्नी सिरमती राठिया ने अनुसार उसने 24 मई 2025 को घरघोड़ा थाने में भी इस फर्जीवाड़े की लिखित शिकायत दी थी, लेकिन आज पर्यंत कोई कार्रवाई नहीं होने पर वह और उसके परिवारजनों ने पुलिस अधीक्षक को आवेदन देकर मामले की जांच कर न्याय दिलाने की गुहार लगाई है।




