कांकेर /ग्राम पंचायतों के विकास कार्यों के लिए लंबे समय से फंड जारी न होने के कारण कांकेर जिले के अंतागढ़ ब्लॉक में दे दिया है,एक साथ इतनी बड़ी संख्या में पंचायत प्रतिनिधियों के इस्तीफा सौंपने से प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
सरपंचों ने प्रशासन को सौंपे गए अपने इस्तीफे में स्पष्ट किया है कि बजट के अभाव में पंचायतों के विकास कार्य पूरी तरह से रुक गए हैं, मिली जानकारी के अनुसार अंतागढ़ ब्लॉक की इन सभी ग्राम पंचायतों में पिछले कई महीनों से विकास कार्यों के लिए आवश्यक राशि आवंटित नहीं की गई है।
सरपंचों का कहना है कि फंड न होने के कारण पंचायत स्तर पर सड़क और नाली निर्माण, पेयजल व्यवस्था और सामुदायिक भवनों से जुड़े मूलभूत कार्य ठप पड़े हुए हैं। गांवों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार रुकने से इसका सीधा असर ग्रामीणों की दिनचर्या पर पड़ रहा है और कई स्वीकृत योजनाएं भी अधूरी पड़ी हुई हैं।
सामूहिक इस्तीफा देने वाले सरपंचों ने बताया कि विकास कार्यों में हो रही देरी के कारण गांव के लोग लगातार उनसे सवाल कर रहे हैं। पंचायत प्रतिनिधियों के रूप में ग्रामीण विकास की जिम्मेदारी उन पर है, लेकिन संसाधनों और बजट की कमी के कारण वे ग्रामीणों को कोई संतोषजनक जवाब देने की स्थिति में नहीं हैं।
गांव वालों की बढ़ती नाराजगी और काम न करा पाने की विवशता के चलते ही उन्होंने सामूहिक तौर पर अपना पद छोड़ने का यह निर्णय लिया है। इस घटनाक्रम के बाद जिला स्तर पर प्रशासनिक अमला सक्रिय हो गया है। प्रशासन के उच्च अधिकारियों द्वारा पूरे मामले का संज्ञान लिया जा रहा है।
माना जा रहा है कि जल्द ही प्रशासनिक स्तर पर सरपंचों के साथ संवाद स्थापित कर बजट आवंटन में आ रही तकनीकी और प्रक्रियात्मक अड़चनों को दूर करने का प्रयास किया जाएगा, ताकि पंचायत प्रतिनिधियों को वापस काम पर लौटाया जा सके और गांवों में रुके हुए विकास कार्यों को दोबारा सुचारू रूप से शुरू किया जा सके।




