
रायगढ़ पुलिस और आबकारी विभाग की संयुक्त टीम ने कोतरारोड़ इलाके के ग्राम धनागर में एक ऐसे ‘मिनी-कारखाने’ का भंडाफोड़ किया है, जो कोरोना काल से लेकर आज तक ‘मौत की शराब’ पैक करके बेच रहा था।
दरअसल पुलिस को मुखबिर से खबर लगी थी कि धनागर का रहने वाला दुष्यंत पटेल उर्फ पप्पू असली शराब के नाम पर ‘केमिकल’ का जहर बांट रहा है, एसएसपी शशि मोहन सिंह ने पुलिस और आबकारी विभाग के साथ एक तगड़ा प्लान बनाया।
जिसके तहत पुलिस ने एक ‘फर्जी ग्राहक’ (प्वाइंटर) बनाकर पप्पू के पास शराब खरीदने भेजा, प्वाइंटर ने दो पौव्वा ‘गोवा’ खरीदी, जब आबकारी अफसरों ने उस पौव्वे को सूंघा और उसका होलोग्राम चेक किया, तो पता चला कि यह ‘गोवा’ नहीं, बल्कि ‘जहर’ है !
सबूत मिलते ही पुलिस ने सीधे पप्पू के घर धावा बोल दिया,पुलिस को देखते ही एक शख्स (पप्पू का बड़ा भाई सुभाष) मौके से फरार हो गया, लेकिन पप्पू धरा गया,जब पुलिस ने घर के पीछे गाय रखने वाले कोठे (तबेले) की तलाशी ली, तो उनकी आंखें फटी रह गईं।
वहां कोई गाय नहीं, बल्कि ब्लैक डॉग, आईबी, रॉयल स्टैग, रिजर्व-7के क्वार्टर और किंगफिशर जैसे महंगे ब्रांड्स की ‘नकली शराब’ का जखीरा पड़ा था।
पूछताछ में पप्पू ने जो खुलासा किया, वह किसी भी शराब पीने वाले को खौफ में डाल देगा,यह गिरोह (पप्पू, उसका भाई सुभाष और साथी विनय सिंह,जो इस खेल का मास्टर माइंड है,) अरुणाचल प्रदेश, झारखंड और छत्तीसगढ़ से सस्ती शराब लाते थे, फिर उसमें यह ‘जहरीला कॉकटेल’ बनाकर कोचियों के जरिए असली शराब के साथ बाजार में खपाया जा रहा था।
आप सोचिए कि कोरोना काल (2020) से यह धंधा चल रहा था, न जाने कितने लोग इस नकली शराब का शिकार हुए होंगे? पुलिस ने मौके से 869 बोतल (लगभग 240 लीटर) नकली शराब, 560 डुप्लीकेट ढक्कन, स्प्रिट के ड्रम और केतलियां जब्त की हैं। इस माल की कीमत करीब 2 लाख 16 हजार रुपये है।
पुलिस ने आरोपी दुष्यंत पटेल (47 साल) को भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आबकारी एक्ट की सख्त धाराओं में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। फरार भाई सुभाष और विनय सिंह की तलाश में पुलिस की कई टीमें दबिश दे रही हैं।




