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बालको ने कार्यस्थल पर चलाया मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता अभियान

कर्मचारियों की भावनात्मक दृढ़ता और जीवन की गुणवत्ता सुधार पर विशेष फोकस


कोरबा,वेदांता समूह की इकाई भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) ने विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर अपने कर्मचारियों के मानसिक सशक्तिकरण और कार्यस्थल पर जीवन की गुणवत्ता में सुधार के उद्देश्य से एक विशेष मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता एवं परामर्श अभियान का आयोजन किया।

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इस अभियान के तहत आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में 150 से अधिक कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कंपनी ने इस अवसर पर कर्मचारियों के समग्र कल्याण और मानसिक दृढ़ता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया।


‘योरदोस्त’ के सहयोग से आयोजित विविध गतिविधियाँ

बालको ने अपने वेलनेस पार्टनर ‘योरदोस्त’ के सहयोग से कई रोचक और ज्ञानवर्धक गतिविधियाँ आयोजित कीं। इनमें प्रमुख रहा “माइंड जिम क्विज़”, जो 60 सेकंड की प्रतियोगिता थी। इस क्विज़ का उद्देश्य कर्मचारियों की एकाग्रता, तर्कशीलता और मानसिक फुर्ती को बढ़ाना था।

कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ मनोवैज्ञानिक डॉ. अंकिता सिंह ने किया। उन्होंने प्रतिभागियों को तनाव के शुरुआती संकेतों की पहचान, व्यक्तिगत एवं व्यावसायिक जीवन में संतुलन बनाने और मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने के व्यावहारिक उपायों के बारे में जानकारी दी।


वन-ऑन-वन काउंसलिंग से मिली व्यक्तिगत सहायता

कर्मचारियों को व्यक्तिगत सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से बालको ने वन-ऑन-वन काउंसलिंग सत्रों की भी व्यवस्था की। इन सत्रों में कर्मचारियों को गोपनीय और सुरक्षित वातावरण में विशेषज्ञों से चर्चा करने का अवसर मिला।
इन परामर्श सत्रों ने कर्मचारियों को अपनी भावनाओं और चिंताओं को पहचानने, व्यक्त करने और समाधान खोजने के लिए प्रेरित किया। इससे संगठन के भीतर “सुनने और सहयोग करने की संस्कृति” को और मजबूती मिली

बालको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं निदेशक श्री राजेश कुमार ने इस अवसर पर कहा —

“कंपनी की प्रगति की शुरुआत लोगों से होती है। आज की तेज़-रफ्तार दुनिया में भावनात्मक संतुलन और मानसिक सुख-शांति अत्यंत आवश्यक है। मानसिक स्वास्थ्य एक साझा जिम्मेदारी है। हमें ऐसा माहौल बनाना चाहिए जहाँ हर व्यक्ति समर्थित, मूल्यवान महसूस करे और बिना किसी भय के परामर्श प्राप्त कर सके। हमारा उद्देश्य एक ऐसा कार्यस्थल तैयार करना है, जहाँ हर आवाज़ सुनी जाए और हर व्यक्ति अपनी पूरी क्षमता से विकसित हो सके।”