नवरात्रि का पर्व शक्ति और नारीत्व का उत्सव है। इसी शक्ति का जीता-जागता उदाहरण आज छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के बालकोनगर में दिखाई देता है। भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) की ‘उन्नति’ परियोजना ने यहाँ की सैकड़ों महिलाओं के जीवन को नई दिशा दी है।
सिर्फ घर-परिवार तक सीमित रहने वाली महिलाएँ अब अपने स्वरोज़गार, व्यवसाय और सामाजिक नेतृत्व से न केवल आत्मनिर्भर बन रही हैं, बल्कि अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा भी बन रही हैं।

✨ पूनम सिंह : शौक से बना ‘डेकोरट्टी’
शांतिनगर की श्रीमती पूनम सिंह बताती हैं कि घर पर सजावटी वस्तुएँ बनाने का उनका शौक ही अब उनका व्यवसाय बन चुका है।
➡️ “पहले मैं केवल परिवार और दोस्तों के लिए ही सामान बनाती थी। उन्नति से जुड़ने के बाद मुझे ग्राहकों से संवाद करना, वस्तुओं की उचित कीमत तय करना और सोशल मीडिया पर अपने उत्पादों का प्रचार करना आया। आज मेरा ब्रांड ‘डेकोरट्टी’ लोगों के घरों की रौनक बढ़ा रहा है। यह संतोष की बात है कि मेरे बनाए उत्पाद त्योहारों और उत्सवों का हिस्सा बनते हैं।”
✨ रथ बाई : ‘छत्तीसा’ ब्रांड की स्वादिष्ट पहचान
श्रीमती रथ बाई का सफर भी किसी मिसाल से कम नहीं। उन्होंने खाद्य उत्पादों का उद्यम शुरू किया, जिसका नाम रखा ‘छत्तीसा’।
➡️ “शुरुआत में मुझे अपने गाँव और क्षेत्र से बाहर उत्पाद बेचने का अनुभव नहीं था। लेकिन उन्नति ने ऑर्डर प्रबंधन, ग्राहक तक पहुँचने और प्रचार का तरीका सिखाया। आज बार-बार मिलने वाले ऑर्डर ही मेरे काम की असली पहचान बन चुके हैं।”
✨ मालती गोस्वामी : वित्तीय समझ ने दी उड़ान
शिक्षा और वित्तीय प्रशिक्षण के मेल से श्रीमती मालती गोस्वामी आज अपने समूह की प्रमुख महिला उद्यमी बन चुकी हैं।
➡️ “पहले मुझे हिसाब-किताब में कठिनाई होती थी। लेकिन अब मैं खुद लाभ-हानि का आकलन करती हूँ, भविष्य की योजना बनाती हूँ और अपने व्यवसाय का प्रबंधन भी संभालती हूँ। पहले मैं दूसरों से सलाह लेती थी, लेकिन अब महिलाएँ मुझसे सलाह लेने आती हैं। यह बदलाव मेरे आत्मविश्वास और साहस का प्रतीक है।”
✨ सरला यादव : नेतृत्व की नई राह
पहले सार्वजनिक मंच पर बोलने से हिचकने वाली श्रीमती सरला यादव अब अपने स्वयं सहायता समूह की अगुवाई करती हैं।
➡️ “हमारी बैठकों में अब सिर्फ बचत या योजनाओं की बातें नहीं होतीं। हम अपने सपनों और चुनौतियों पर चर्चा करते हैं और एक-दूसरे का हौसला बढ़ाते हैं। सबसे बड़ी सीख यह है कि हमारी आवाज़ मायने रखती है।”
‘उन्नति’ परियोजना से अब तक सैकड़ों महिलाएँ जुड़ चुकी हैं।
महिलाएँ स्वरोज़गार के साथ-साथ सामाजिक नेतृत्व की भूमिका भी निभा रही हैं।
त्योहारों पर महिलाओं के बनाए उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है।
महिलाओं को वित्तीय साक्षरता, बाजार प्रबंधन और डिजिटल प्रशिक्षण की सुविधा दी जा रही है।


