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पुलिस वाले अपना दुख दर्द किसको बताए,कहाँ जाए–??

बालोद / आमजन की सुरक्षा में दिनरात सजग रहनेवाले पुलिस व उनके परिजन अपने में ही सुरक्षित नहीं है? पुलिस जवानों को एक ओर काम का दबाव व पारिवारिक/मानसिक परेशानियों से घिरे हुए कसमस भरी जिन्दगी जीने को मजबूर है -क्योकि यहाँ उनकी सुननेवाला कोई नहीं है ….????

इसी कड़ी में आज बालोद के शिकारीपारा वार्ड के रहने वाले आरक्षक की पत्नी ने अपनी बेटी की गला घोंटकर हत्या कर दी,उसके बाद उसने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली,वही पुत्र ने भागकर अपनी जान बचाई पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है,मामला बालोद शहर थाना क्षेत्र का है,

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पुलिस से जानकारी के अनुसार मृतिका निकिता पटौदी का पति कॉन्स्टेबल था जिसका पहले ही एक सड़क हादसे में उसकी मौत हो गई थी,पति की मौत के बाद निकिता पटौदी डिप्रेशन में थी, महिला डिप्रेशन के बाद उसने आत्महत्या करने का फैसला किया और उसने पहले अपने बाल आरक्षक बेटे को मारना चाहा पर वो किसी तरह से अपने को छुड़ाकर बगल में अपनी मौसी के कमरे में जाकर सो गया,इसके बाद महिला ने अपनी बेटी को गलाघोटकर मार डाला और फांसी का फंदा बनाकर झूल गई,

परिजनों  का कहना है कि निकिता पटौदी पिछले कुछ साल से मानसिक रूप से अस्वस्थ थी,शुक्रवार-शनिवार की रात करीब 1 बजे पहले उसने अपने बेटे को मारने की कोशिश की गहरी नींद में सो रहे बेटे रेवेंद्र पटौदी की उसने गला दबाने की कोशिश की लेकिन बेटा किसी तरह से अपनी जान बचाकर वहां से भाग गया,

अपनी मां की हरकत के बाद रेवेंद्र अपनी मौसी के कमरे में पहुंचा और जाकर चुपचाप सो गया,जिससे उसकी जान बच गई, बालक यदि रात में घटना की जानकारी घर के बाकी लोगों को दे देता तो शायद ये घटना नहीं होती-??

सुबह जब पड़ोसी अपनी घर का पोताई कर रहा था,तब उसने रोशनदान से उनके कमरे में देखा महिला फांसी पर झूल रही थी, जिसके बाद उसने इसकी जानकारी महिला के परिजनों को दी, और परिजनों ने घटना की जानकारी पुलिस को दी,सूचना पर पहुची पुलिस ने शव को pm के लिए भेज अपनी कार्यवाई शुरू कर दी है,