रायगढ़ / जिंदल फाउंडेशन द्वारा संचालित विशेष बच्चों की संस्था जिंदल आशा में प्रशिक्षण हासिल कर रहे बच्चों ने एक बार फिर रायगढ़ ही नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ का नाम रोशन किया है। जिंदल आशा की छात्रा श्याम बाई सिदार ने 7वीं पैरा आर्चरी नेशनल चैंपियनशिप में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक हासिल किया है। राष्ट्रीय स्तर की इस प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ पैरा तीरंदाजी टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 11 पदक अपने नाम किए।

7वीं पैरा आर्चरी नेशनल चैंपियनशिप का आयोजन इस वर्ष 28 जनवरी से 3 फरवरी के बीच पंजाब के पटियाला में किया गया। इस प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ टीम का नेतृत्व जिंदल आशा की छात्रा श्याम बाई सिदार ने किया। वे लोकोमोटर डिसेबिलिटी से ग्रस्त हैं। उन्होंने इंडियन आर्चरी महिला टीम राउंड में चंचल सोनी के साथ मिलकर दमदार प्रदर्शन किया।

दोनों खिलाड़ियों ने फाइनल मुकाबले में राजस्थान की टीम को पराजित कर स्वर्ण पदक जीतते हुए प्रदेश को गौरवान्वित किया। प्रतियोगिता के अन्य मुकाबलों में भी छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों ने बेहतरीन खेल का प्रदर्शन किया। 1 फरवरी को आयोजित 50 मीटर व्यक्तिगत स्पर्धा में चंचल सोनी ने रजत पदक, जबकि 30 मीटर स्पर्धा में कांस्य पदक प्राप्त किया। पुरुष वर्ग की 30 मीटर स्पर्धा में हरिओम शर्मा ने कांस्य पदक जीतकर टीम की सफलता में योगदान दिया।
इसके अलावा मिक्स टीम स्पर्धा में छत्तीसगढ़ टीम ने तमिलनाडू को हराकर कांस्य पदक अपने नाम किया। वहीं ओलंपिक राउंड में भी चंचल सोनी ने रजत पदक हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। कोच मनमोहन पटेल के मार्गदर्शन में 18 सदस्यीय छत्तीसगढ़ टीम ने यह उल्लेखनीय उपलब्धि अर्जित की।
इस ऐतिहासिक सफलता पर जिंदल फाउंडेशन की चेयरपर्सन श्रीमती शालू जिंदल ने सभी खिलाड़ियों को बधाई देते हुए कहा कि जिंदल आशा में विशेष बच्चों को उनकी रुचि और क्षमता के अनुसार संवेदनशीलता के साथ प्रशिक्षण एवं प्रोत्साहन दिया जाता है। उन्होंने कहा कि इन बच्चों की उपलब्धियां यह साबित करती हैं कि सही मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर विशेष बच्चे भी असाधारण प्रदर्शन कर सकते हैं।
जिंदल स्टील लिमिटेड, रायगढ़ के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर सब्यसाची बंद्योपाध्याय ने खिलाड़ियों और उनके अभिभावकों को बधाई देते हुए कहा कि कंपनी भविष्य में भी ऐसे विशेष बच्चों को आगे बढ़ाने के लिए हरसंभव सहयोग करती रहेगी। वहीं सीएसआर महाप्रबंधक अपूर्व चौधरी ने खिलाड़ियों की सफलता की सराहना करते हुए अभिभावकों के धैर्य, साहस और समर्पण को प्रेरणादायक बताया।
जिंदल आशा के प्रभारी गौरव कपूर ने बताया कि श्याम बाई सिदार ने बहुत कम समय के प्रशिक्षण में यह उपलब्धि हासिल कर यह सिद्ध कर दिया है कि लगन, मेहनत और दृढ़ निश्चय के बल पर किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। उनका संघर्ष और सफलता अन्य विशेष बच्चों के लिए प्रेरणास्रोत है।
गौरतलब है कि जिंदल आशा, जिंदल फाउंडेशन के प्रमुख कार्यक्रमों में से एक है, जो विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के संपूर्ण विकास के लिए समर्पित है। इस संस्था के माध्यम से प्रारंभिक हस्तक्षेप, फिजियोथेरेपी, व्यावसायिक चिकित्सा, विशेष शिक्षा, भाषण चिकित्सा, कौशल विकास के साथ-साथ पैरा स्पोर्ट्स एवं स्पेशल स्पोर्ट्स में विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है, ताकि ये बच्चे आत्मनिर्भर बन सकें और समाज में सम्मानजनक पहचान बना सकें।




