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चार सप्ताह में बकाया किराया जमा नहीं कराया तो बेदखली,लकड़ी टाल कोतरा रोड का मामला -हाईकोर्ट

बिलासपुर / छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की डबल बेंच खंडपीठ ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण फैसले में रायगढ़ के एक संपत्ति विवाद में किराया नियंत्रण प्राधिकरण के आदेश को बहाल कर दिया है, यह फैसला किराएदार के खिलाफ एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है, जिसमें किराएदार को चार सप्ताह के अंदर बकाया किराया जमा करने का अंतिम अवसर दिया गया है, अन्यथा बेदखली की कार्रवाई होगी।

दरअसल यह पूरा मामला बैकुंठपुर की एक जमीन का है,यहाँ गायत्री देवी अग्रवाल एवं अन्य बनाम निर्मला देवी सिंघानिया एवं अन्य से संबंधित है, जिसमें रायगढ़ की जमीन, ग्राम बैकुंठपुर, तहसील जिला रायगढ़, खसरा नंबर 141/1/1 रकबा 0.541 हेक्टेयर शामिल है,यह विवाद गोपाल सिंघानिया आ. धनसिंग के लकड़ी टाल कोतरा रोड के संबंध में भी है,

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27 नवंबर को दिए गए आदेश में हाईकोर्ट की खंडपीठ ने किराया नियंत्रण प्राधिकरण रायगढ़ द्वारा 25 मार्च 2022 को पारित मूल आदेश को बहाल रखा, जिसे रायपुर स्थित किराया न्यायाधिकरण अदालत ने 20 दिसंबर 2022 को निरस्त कर दिया था, किराएदार को निर्देश दिया गया कि वह आदेश की तारीख से चार सप्ताह के अंदर संपूर्ण बकाया किराया जमा करे।

यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि किराएदार निर्धारित समय-सीमा में किराया जमा नहीं करता है, तो उसे आगे कोई अवसर नहीं मिलेगा,किराया जमा न करने की स्थिति में संबंधित प्राधिकरण को किराएदार की बेदखली और किराया जमा से संबंधित संपूर्ण कानूनी कार्रवाई दो महीने के भीतर पूरी करने का निर्देश दिया गया है, याचिकाकर्ता गायत्री देवी की ओर से अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी ने पैरवी की।

आपको बता दें कि इस फैसले को छत्तीसगढ़ किराया नियंत्रण अधिनियम, 2016 के तहत एक महत्वपूर्ण निर्णय के रूप में देखा जा रहा है, जो किराएदार और मकान मालिक दोनों के हितों को विनियमित करने के लिए त्वरित न्याय तंत्र प्रदान करता है,यह आदेश उन मामलों में एक मिसाल कायम करता है जहां किराएदार लंबे समय तक किराया भुगतान में चूक करते हैं….